My poetry

तुम और मैं

Written on 09.05.2010

तुम एक कली उपवन की हो, मैं जंगल का उन्मत्त भ्रमर ।

क्या सह पाओगी तुम मेरा, सूरज किरणों सा प्यार प्रखर ।1।

तुम कतकी पूनो के जैसी, हो श्वेत शांत शीतल सुरम्य ।

पर मेरा प्यार है सागर के, निर्बंध ज्वार जैसा अदम्य ।2।

तुम शरत काल की मलय अनिल, मैं झोंका उष्ण जेठ का हूँ ।

हो चन्दन सी सुखप्रद तुम मैं, हर ओर धधकता फिरता हूँ ।3।

तुम तुहिन कनी किसलय कोमल, क्या मुझको सह पाओगी ।

क्या इस अधीर आतुर आकुल, झंझा संग रह पाओगी ।4।

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